Kya batau ki kya Madina hai lyrics / क्या बताऊँ की क्या मदीना है

शफ़ाअ-ए-रोज़-ए-महशर पे लाखों सलाम
साक़ी-ए-हौज़-ए-कौसर पे लाखों सलाम
क़ासिम-ए-ने'मत ओ मालिक-ए-जुज़ ओ कुल
दोनों आलम के सरवर पे लाखों सलाम
अर्श से आगे जिसकी रसाई हुई
यानी महबूब-ए-दावर पे लाखों सलाम
ज़ुल्फ़ ओ रुख़सार की खाए क़ुरान क़सम
मुस्तफ़ा नूरी पैकर पे लाखों सलाम
उनके रोज़े की हुरमत पे बेहद दुरूद
उनके मेहराब ओ मिंबर पे लाखों सलाम
हश्र में "उम्मती उम्मती" की सदा
इस शफ़ाअत के तेवर पे लाखों सलाम
जिसके सदक़े में जन्नत का मुज़्दा मिला
सज्दा-ए-यौम-ए-महशर पे लाखों सलाम
नाज़-ए-सिद्क़ ओ सफ़ा, फ़ख़्र-ए-जूद ओ सखा
यानी सिद्दीक़-ए-अकबर पे लाखों सलाम
हज़रत-ए-उस्मान की शर्म ओ हया पर दुरूद
इब्न-ए-ख़त्ताब ओ हैदर पे लाखों सलाम
जिसके बेटे इमाम और शौहर इमाम
सरवर-ए-दीन की दुख़्तर पे लाखों सलाम
फ़ख़्र-ए-आले पयंबर कहें हम जिन्हें
यानी शब्बीर ओ शब्बर पे लाखों सलाम
मज़्हर-ए-शाने क़ुदरत हैं ग़ौस-उल-वरा
मअरिफ़त के समंदर पे लाखों सलाम
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगान दीन-ए-हक़ के मोईन
इस्तिक़ामत के जेहर पे लाखों सलाम
शाह-ए-बरकत की बरकत पे बेहद दुरूद
बहर-ए-इरफ़ान के गोहर पे लाखों सलाम
हमको सिखलाई अच्छे बुरे की तमीज़
आला हज़रत जैसे रहबर पे लाखों सलाम
आशिक़-ए-मुस्तफ़ा जिब्रील-ए-अमीन
उनके नूरानी सःपَر पे लाखों सलाम
इश्क़-ए-अहमद में नज्मी जो सरशार हो
उसके ऊँचे मुक़द्दर पे लाखों सलाम
شفاءِ روزِ محشر پہ لاکھوں سلام
ساقیٔ حوضِ کوثر پہ لاکھوں سلام
قاسمِ نعمت و مالکِ جز و کل
دونوں عالم کے سرور پہ لاکھوں سلام
عرش سے آگے جس کی رسائی ہوئی
یعنی محبوبِ داور پہ لاکھوں سلام
زلف و رُخسار کی کھائے قرآن قسم
مصطفٰی نوری پیکر پہ لاکھوں سلام
ان کے روضے کی حرمت پہ بے حد دُرود
ان کے محراب و منبر پہ لاکھوں سلام
حشر میں "اُمّتی اُمّتی" کی صدا
اس شفاعت کے تیور پہ لاکھوں سلام
جس کے صدقے میں جنت کا مژدہ ملا
سجدۂ یومِ محشر پہ لاکھوں سلام
نازِ صدق و صفا، فخرِ جود و سخا
یعنی صدّیقِ اکبر پہ لاکھوں سلام
حضرتِ عثمان کی شرم و حیا پر دُرود
ابنِ خطاب و حیدر پہ لاکھوں سلام
جس کے بیٹے امام اور شوہر امام
سرورِ دین کی دختر پہ لاکھوں سلام
فخرِ آلِ پیمبر کہیں ہم جنہیں
یعنی شبیر و شبّر پہ لاکھوں سلام
مظہرِ شانِ قدرت ہیں غوثُ الورٰی
معرفت کے سمندر پہ لاکھوں سلام
خواجۂ خواجگان دینِ حق کے معین
استقامت کے جوہر پہ لاکھوں سلام
شاہِ برکت کی برکت پہ بے حد دُرود
بحرِ عرفان کے گوہر پہ لاکھوں سلام
ہم کو سکھلائی اچھے برے کی تمیز
اعلیٰ حضرت جیسے رہبر پہ لاکھوں سلام
عاشقِ مصطفیٰ جبریلِ امین
ان کے نورانی سَپَر پہ لاکھوں سلام
عشقِ احمد میں نَجمی جو سرشار ہو
اُس کے اونچے مقدر پہ لاکھوں سلام
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