वो माह-ए-फ़रोज़ाँ वो नय्यर-ए-ताबाँ
वो माह-ए-फ़रोज़ाँ वो नय्यर-ए-ताबाँ
मेरा मुस्तफ़ा है मेरा मुस्तफ़ा है
वो बारह रबीउल-अव्वल को आया
जो अव्वल बना है मेरा मुस्तफ़ा है
तो क्या तूने देखा वो आना वो जाना
कि हैरत में है अब तलक ये ज़माना
वो रब का बुलाना वो सब को बताना
जो हाँ आ रहा है मेरा मुस्तफ़ा है
तो क्या तूने देखा वो आना वो जाना
कि हैरत में है अब तलक ये ज़माना
क़ुद्सी खड़े हैं हैरान होके
कि सिद्रा से आगे बशर जा रहा है
जाता है देखो बेख़ौफ़ कैसे
कि सब जानता है ये राहें वो जैसे
वो यूँ जा रहा है जैसे कि कोई
घर वाला अपने ही घर जा रहा है
वो क़िस्सा हलीमा के आँगन का देखो
जवानी से पहले तुम बचपन का पूछो
अभी मुस्तफ़ा ने हिलाई है उंगली
कमर से तो पूछो किधर जा रहा है
अक़्सा में जितने भी मुरसाल खड़े थे
हैरत में सारे के सारे खड़े थे
कि हम इनके पीछे ये क्या पढ़ रहे हैं
नमाज़ें ही लेने अगर जा रहा है
कहाँ तू है शाकिर कहाँ उनकी नातें
कहाँ अपनी ज़ातें कहाँ उनकी बातें
ये क्यूँ कह रहे हो बशर जा रहा है
हक़ीक़त में ख़ैरुल बशर जा रहा है
यही कलाम अलग अंदाज़ में
वो माहे फ़रोज़ाँ वो नय्यारे ताबाँ
मेरा मेरा मुस्तफ़ा है मेरा मुस्तफ़ा है
वो बारह रबीउल-अव्वल को आया
जो अव्वल बना है मेरा मुस्तफ़ा है
तो क्या तूने देखा वो मौसम का बदलना
वो पत्थर ज़मीन पर फूलों का खिलना
वो अर्श-ए-उला का ज़मीन पर उतरना
जो हाँ उतरा है मेरा मुस्तफ़ा है
तो क्या तूने देखा है क़ुरआन को चलते
कि सहरा में जैसे दरिया हैं बहते
वो तारीक रातों में सूरज निकलते
जो हाँ निकला है मेरा मुस्तफ़ा है
तो क्या तूने देखा वो रहमत का मंज़र
इधर से दुआएँ उधर से हैं पत्थर
वो ताइफ़ की वादी, वो दौार का दिलबर
जो तन्हा खड़ा है मेरा मुस्तफ़ा है
तो क्या तूने देखा वो आना वो जाना
कि हैरत में है अब तलक ये ज़माना
वो रब का बुलाना, वो सब को दिखाना
ये जो आ रहा है मेरा मुस्तफ़ा है
तो क्या तूने देखी हैं ऐसी क़बाएं
कि माह-ओ-महर भी लें जिनसे ज़ियाएं
वो पेहवंद की जैसी सजी कहकशाएं
जो ये पहनता है मेरा मुस्तफ़ा है
To kya to NY dehka attao ka jobun
ReplyDeleteHassan py sana e Muhammad ka sawan
Yeh lafz ye misry ye shero ka bandhan
Jo kuch dy rha hy mera Mustafa hy
Yeh Bhai is naat ka original maqta hy....poet Hassan Javed hein
DeleteOr meraj valy sher k baad valy sher is kalam k ni please isko thk krdy.....
DeleteTo kya to NY dehka wo ana wo Jana.....k baad valy sher is kalam k ni Hein
Muhammad Ali bahi.............Hassan Javed sab ke koe naat nhai mili Net say...our yeah mazeeed Ashar jo huwa karty hain wo Tazmem huwa karty hain
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